हिन्दी भाषा और साहित्य में कृ हिम बुद्धिमत्ता (AI) का प्रयोग: अवसर, चुनौहियााँ एवं भहवष्य की संभावनाएाँ
Author
डॉ इन्द्रजीत यादव
Abstract
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) वर्तमान समय की सबसे प्रभावशाली तकनीकों में से एक है, जिसने शिक्षा, भाषा, साहित्य, अनुसंधान, संचार तथा ज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक परिवर्तन उत्पन्न किए हैं। भारतीय भाषाओं, विशेषकर हिन्दी भाषा एवं साहित्य के क्षेत्र में भी AI का उपयोग निरंतर बढ़ रहा है। प्राकृतिक भाषा संसाधन, मशीन अनुवाद, वाक् पहचान, पाठ-से-वाक्, ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन तथा जनरेटिव AI आधारित उपकरणों ने हिन्दी भाषा के अध्ययन, अध्यापन, अनुसंधान और सृजनात्मक लेखन के स्वरूप को नई दिशा प्रदान की है। आज ChatGPT, Google Gemini, Microsoft Copilot तथा अन्य AI आधारित प्रणालियाँ भाषा शिक्षण, सामग्री निर्माण, संपादन, अनुवाद और शोध-सहायता जैसे कार्यों में प्रभावी भूमिका निभा रही हैं।
यद्यपि AI हिन्दी भाषा एवं साहित्य के विकास के लिए अनेक संभावनाएँ प्रस्तुत करता है, किन्तु इसके साथ मौलिकता, बौद्धिक संपदा अधिकार, तथ्यात्मक शुद्धता, एल्गोरिथ्मिक पक्षपात, भाषाई विविधता के संरक्षण तथा नैतिक उत्तरदायित्व जैसी गंभीर चुनौतियाँ भी जुड़ी हुई हैं। यदि AI का उपयोग बिना मानवीय समीक्षा और आलोचनात्मक दृष्टिकोण के किया जाए तो साहित्यिक गुणवत्ता, रचनात्मकता और शोध की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है। अतः AI को मानव बुद्धि का विकल्प न मानकर एक सहायक उपकरण के रूप में अपनाना अधिक उपयुक्त होगा।
प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य हिन्दी भाषा और साहित्य में AI के विभिन्न अनुप्रयोगों, उनसे प्राप्त होने वाले अवसरों, प्रमुख चुनौतियों तथा भविष्य की संभावनाओं का विश्लेषणात्मक अध्ययन करना है। साथ ही यह शोध-पत्र शिक्षा, अनुसंधान एवं साहित्यिक सृजन के क्षेत्र में AI के उत्तरदायी एवं नैतिक उपयोग की आवश्यकता पर भी प्रकाश डालता है। यह अध्ययन विशेष रूप से उच्च शिक्षा, शोधार्थियों, अध्यापकों तथा हिन्दी भाषा के विद्वानों के लिए उपयोगी सिद्ध हो सकता है।
Keywords
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence), हिन्दी भाषा, हिन्दी साहित्य, प्राकृतिक भाषा संसाधन (NLP), जनरेटिव AI, मशीन अनुवाद, डिजिटल मानविकी, भाषा शिक्षण, शोध, नैतिकता
Full Text:
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