संस्कृत के प्रकाश में कुंभ मेलाः लोकज्ञान और शास्त्रीय ज्ञान का समन्वय
Author
अनिता बीदावत
Abstract
“संस्कृत के प्रकाश में कुंभ मेलाः लोकज्ञान और शास्त्रीय ज्ञान का समन्वय” विषय भारतीय सांस्कृतिक परम्परा के उस विशिष्ट आयाम को उद्घाटित करता है, जहाँ लोकजीवन की सहज अनुभूति और शास्त्रीय ज्ञान की गहनता का अद्भुत संगम दृष्टिगत होता है। कुंभ मेला केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता का जीवंत सांस्कृतिक और दार्शनिक प्रतीक है, जिसका मूलाधार वेद, पुराण और अन्य संस्कृत ग्रंथों में निहित है।
संस्कृत साहित्य में कुंभ का उल्लेख विशेष रूप से पुराणों जैसे भागवत पुराण, स्कन्द पुराण आदि में मिलता है, जहाँ समुद्र मंथन की कथा के माध्यम से अमृत कलश (कुंभ) की उत्पत्ति का वर्णन किया गया है। यह कथा केवल पौराणिक आख्यान नहीं, बल्कि ज्ञान, अमरत्व और आत्मोद्धार का प्रतीकात्मक निरूपण है। संस्कृत के इन शास्त्रीय स्रोतों ने कुंभ मेले की वैचारिक और आध्यात्मिक संरचना को आधार प्रदान किया है। लोकज्ञान कुंभ मेले के सामाजिक, सांस्कृतिक और व्यवहारिक पक्ष को सशक्त बनाता है। लोक परम्पराओं, रीति-रिवाजों, गीतों, कथाओं और आस्थाओं के माध्यम से यह ज्ञान पीढ़ी दर पीढ़ी संचारित होता रहा है। साधु-संतों की वाणी, लोकभाषाओं में प्रचलित कथाएँ और जनसामान्य की आस्था कुंभ मेले को एक व्यापक जनोत्सव का स्वरूप प्रदान करती हैं।
Keywords
कुंभ मेले का दार्शनिक एवं शास्त्रीय आधार, कुंभ मेले में लोकज्ञान की परंपरा, संस्कृत साहित्य में ज्ञान परंपरा और कुंभ, लोकज्ञान और शास्त्रीय ज्ञान का समन्वय, आधुनिक परिप्रेक्ष्य में कुंभ मेला और ज्ञान का स्वरूप।
Full Text:
References
1.राम शरण शर्मा - भारतीय संस्कृति और परंपरा, राजकमल प्रकाशन, नई दिल्ली, 2010, पृष्ठ संख्या 120-145।
2.हजारी प्रसाद द्विवेदी - भारतीय संस्कृति की रूपरेखा, लोकभारती प्रकाशन, इलाहाबाद, 2008, पृष्ठ संख्या 85-110।
3.वासुदेव शरण अग्रवाल - भारतीय कला और संस्कृति, साहित्य भवन, इलाहाबाद, 2005, पृष्ठ संख्या 200-230-
4.कपिल कपूर - संस्कृत और भारतीय ज्ञान परंपरा, डी.के. प्रिंटवर्ल्ड, नई दिल्ली, 2012, पृष्ठ संख्या 55-90।
5.बलदेव उपाध्याय - संस्कृत साहित्य का इतिहास, शारदा निकेतन, वाराणसी, 2014, पृष्ठ संख्या 310-340।
6.रामधारी सिंह दिनकर - संस्कृति के चार अध्याय, लोकभारती प्रकाशन, पटना, 2011, पृष्ठ संख्या 150-180।
7.सत्यकेतु विद्यालंकार - प्राचीन भारतीय संस्कृति, सरस्वती सदन, नई दिल्ली, 2009, पृष्ठ संख्या 220-260।
8.नगेन्द्र - भारतीय साहित्य और संस्कृति, नेशनल पब्लिशिंग हाउस, दिल्ली, 2007, पृष्ठ संख्या 95-130।
9.राधाकमल मुखर्जी - भारतीय समाज और संस्कृति, राजकमल प्रकाशन, नई दिल्ली, 2006, पृष्ठ संख्या 180-210।
10.भगवतशरण उपाध्याय - भारतीय धर्म और संस्कृति, भारतीय ज्ञानपीठ, नई दिल्ली, 2013, पृष्ठ संख्या 140-175।