भारतीय धर्म-दृष्टि में दुःख
Author
डॉ. नाजनी बेगम
Abstract
मानवतावादी चेतना से अनुप्राणित दोनों ही परम्पराओं के अधीनस्थ धर्मों को मूल दृष्टि जीवन और जगत् को आक्रान्त करने वाले ‘दुःख’ पर है । इस लक्ष्य को अपने मैं सन्निवेशित कर जीवन एवं जगत् की दुःख से पूर्णतः निर्निमुक्त किया जाए। लेकिन यह तब तक संभव नहीं है, जब तक कि इसके कारण का सम्यक् बौध नहीं ह ो। एक चिकित्सक तभी व्यक्ति को रोग-मुक्त कर पाता है जब उसे न केवल रोग वरन् रोग के कारण का सम्यक जान होता है। दुःख के कारण सम्बन्धी भारतीय धर्म-परम्परा क ी दृष्टि के उद्बोधन का अर्थ है- इसके अधीनस्थ तीनों प्रमुख धर्मों-हिन्दू, जैन एवं बौद्ध धर्माें-को दुःख के कारण की दृष्टि का अभिप्रकाशन । प्रस्तुत प्रसंग में यही अभिप्रकाशन हमारा लक्ष्य है
Keywords
दुःख, हिन्दू, जैन, बौद्ध, धर्म, ग्रन्थ्
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References
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