दिव्यांगजनों के लिए शासकीय कल्याणकारी सुविधाओं की पहुँच एवं सामाजिक दृष्टिकोण का अध्ययन: अधिकार-आधारित एवं सार्वभौमिक समावेशन के परिप्रेक्ष्य में
Author
अरविन्द कुमार तिवारी , डॉ. ए.के. सिन्हा
Abstract
दिव्यांगजन समाज का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जिनकी सामाजिक स्थिति, गरिमापूर्ण जीवन, समान अवसरों तथा विकास की मुख्यधारा में सहभागिता किसी भी समावेशी समाज की महत्वपूर्ण कसौटी मानी जाती है। आधुनिक कल्याणकारी राज्य में दिव्यांगजनों के लिए विभिन्न प्रकार की सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा, रोजगार, आर्थिक सहायता, पुनर्वास तथा सहायक उपकरण संबंधी सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाती हैं। इन सुविधाओं का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि दिव्यांगजनों को समान अधिकार, अवसर एवं सामाजिक सहभागिता उपलब्ध कराना है। तथापि, शासकीय योजनाओं की उपलब्धता और उनके वास्तविक लाभ के बीच जागरूकता, प्रशासनिक प्रक्रियाओं, सामाजिक दृष्टिकोण तथा स्थानीय परिस्थितियों के कारण अंतर दिखाई दे सकता है।
प्रस्तुत अध्ययन का प्रमुख उद्देश्य दिव्यांगजनों के लिए उपलब्ध शासकीय कल्याणकारी सुविधाओं की पहुँच तथा उनके प्रति समाज के दृष्टिकोण का विश्लेषण करना है। अध्ययन में दिव्यांगजनों के सामाजिक समावेशन को अधिकार-आधारित एवं सार्वभौमिक समावेशन के व्यापक परिप्रेक्ष्य में समझने का प्रयास किया गया है। अध्ययन के क्षेत्रीय संदर्भ के रूप में मध्य प्रदेश के रीवा जिले की त्योंथर तहसील को भी ध्यान में रखा गया है, जिससे ग्रामीण एवं स्थानीय सामाजिक परिस्थितियों के संदर्भ में विषय को समझने में सहायता मिलती है। अध्ययन में यह विचार किया गया है कि सरकारी सुविधाओं की जानकारी, उपलब्धता एवं उपयोगिता के साथ-साथ परिवार, समुदाय और सामाजिक संस्थाओं का दृष्टिकोण दिव्यांगजनों के जीवन एवं सामाजिक सहभागिता को किस प्रकार प्रभावित करता है।
अध्ययन यह रेखांकित करता है कि दिव्यांगजनों का वास्तविक सशक्तीकरण केवल कल्याणकारी योजनाओं के विस्तार से संभव नहीं है, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन, सुविधाओं तक सरल पहुँच, अधिकारों के प्रति जागरूकता तथा सकारात्मक सामाजिक दृष्टिकोण के विकास की भी आवश्यकता है। दिव्यांगजनों को दया एवं सहायता के पात्र के रूप में देखने के स्थान पर समान अधिकारों वाले नागरिक के रूप में स्वीकार करना सामाजिक समावेशन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इस दृष्टि से अधिकार-आधारित नीतियों, सामुदायिक जागरूकता तथा बाधारहित सामाजिक वातावरण का विकास दिव्यांगजनों की गरिमा, आत्मनिर्भरता एवं समान सहभागिता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
Keywords
दिव्यांगजन, शासकीय कल्याणकारी सुविधाएँ, सामाजिक दृष्टिकोण, सामाजिक समावेशन, अधिकार-आधारित दृष्टिकोण, सार्वभौमिक समावेशन, दिव्यांगता, त्योंथर, रीवा।
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